काग़ज़

कि कहूं अगर चांद से भी, कि दो लफ्ज़ लिखे तारीफ में तेरी, मानो मेरी, रह जाएगा वो कागज खाली, क्यूंकि लफ्जो में तेरा बयां है ही नहीं। dark_anki Continue reading काग़ज़

वक़्त

ए वक़्त रुक जा कुछ ओर वक़्त के लिए, अभी तो हमने जीना सीखा है। कह सके सीना तान! कि हमने भी, ज़माने को करीब से देखा है। dark_anki Continue reading वक़्त

गुजरे हुए वक़्त!

ए मेरे गुजरे हुए वक़्त, तुझे आज भी याद करता हूँ, एक पल हंस देता हूँ, और अगले पल संग बिताए उन, लम्हो के लिए रो भी लेता हूँ! ए मेरे गुजरे वक़्त मैं, आज भी तुझे याद करता हूँ। dark_anki Continue reading गुजरे हुए वक़्त!