अनकहे अल्फ़ाज़!

सनसनाती कानो को चूमती हुई, इन हवाओं में जिक्र, यूँ है, कि कहीं दूर खुश है वो फिर, दिल को उसकी फिक्र क्यों है। बारिश की बूंदों में कैसी ये कशिश है, शक होता है कि कुछ तो इनकी रंजिश है, दो दिल मिलाने की नाकाम ये कोशिश है, दायर वो मोहब्बत-ए-दरख्वास्त, हुई खारिज है। … Continue reading अनकहे अल्फ़ाज़!