अनकहे अल्फ़ाज़!

सनसनाती कानो को चूमती हुई, इन हवाओं में जिक्र, यूँ है, कि कहीं दूर खुश है वो फिर, दिल को उसकी फिक्र क्यों है। बारिश की बूंदों में कैसी ये कशिश है, शक होता है कि कुछ तो इनकी रंजिश है, दो दिल मिलाने की नाकाम ये कोशिश है, दायर वो मोहब्बत-ए-दरख्वास्त, हुई खारिज है। … Continue reading अनकहे अल्फ़ाज़!

The Watch

26 july 2018, 7 pm I was at my brother’s hostel. He had asked me to come. We were in his room. “The parcel, the watch, it came.” He said. I took it, put it on my hand. “I will buy this one for myself too.” I told myself. Well..! One and half weeks ago, … Continue reading The Watch