नव उदय

​यूँ देखता हूँ पीछे, मुड़ के  जिंदगी भी अपनी क्या थी, माना थी दर्द भरी, पर खूबसूरत रही, माना यूँ पानी की कमी रही, पर जुबाँ न कभी सूखी थी, माना बातें रह गयी कुछ अधूरी, पर पूरी कहने वालों से कहाँ नूरी मिली, माना आंखें मेरी बहुत बही, पर इस दिल की किसने सुनी, … Continue reading नव उदय